आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है कल (21-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
संगीता जी और वंदना जी का विनम्र आभार ! आप न केवल स्त्री मन की बारीकी समझती हैं बल्कि हौसला बढ़ाने में भी कोई कमी नहीं छोड़तीं ! दिनेश जी ने क्या कहना चाहा है,मैं नहीं समझ पायी ! उतनी पैनी समझ है नहीं मेरी अभी ! फिर भी पढ़ा उसके लिए धन्यवाद.
पुरुष शरीर से या मन से होना दोनों अलग अलग बात है.शास्त्रों में पुरुष आत्मा को कहा गया है.साधारणतया जिसकी मन बुद्धि स्थिर हो उसको पुरुष कहते है.ऐसी स्थिर स्वभाव की स्त्री भी पुरुष माने जाने योग्य है.चंचल मन बुद्धि वाला पुरुष तो स्त्री माने जाने योग्य है.वैसे शरीर से पुरुष पति या केवल बच्चा पैदा करने वाला ही न होकर एक भाई,पिता ,पुत्र आदि भी होता है.पति या प्रेमी के रूप में पुरुष को शारीरिक सम्बन्ध के अतिरिक्त पत्नी/प्रेमिका के मन से मन मिलाना ही चाहिये.
राकेश जी, जी हाँ बिलकुल . ये तो चित्त है जो स्त्रैण या पुरुशैन्न होता है. लेकिन अगर गौर से पढ़ा हो आपने तो ध्यान दिया होगा मैंने biologically men/women की बात की है यहाँ. और यह बयान किया है कि स्त्री मन को हलके में न लिया जाए..बल्कि उसकी गहराई तक जाया जाए .. और ये जो मैंने लिखा है, एक हज़ार स्त्रियों से पूछकर survey कर लीजिये अगर वे सहमत न हुईं तो कहियेगा ? जनाब , स्त्री की भूख पूरी मन कि है, समझ लें इस बात को. और रही बात शास्त्रों की, तो क्षमा करियेगा शास्त्रों को मैंने खारिज कर दिया था १३ वर्ष की उम्र में ! इसलिए नहीं की वे गलत लिखे गए हैं, बल्कि इसलिए कि मुझे उससे ज्यादा बेहतरीन चीज़ें मिल गयीं. मेरे लिए तो ये 'मानवता ' ही गीता , कुरान ,शास्त्र ,उपनिषद हैं .आपके भीतर बैठे परमात्मा को मेरा प्रणाम और धन्यवाद कि आपने पढ़ा . :-)
14 comments:
बीज!
खाए जा सकते हैं,
उगाए नहीं,
यदि उन्हें उगाने को
धरती न हो,
वे खाए भी नहीं जा सकते
यदि उगाए न जाएँ
सत्य लेकिन कटु
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (21-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com/
संगीता जी और वंदना जी का विनम्र आभार ! आप न केवल स्त्री मन की बारीकी समझती हैं बल्कि हौसला बढ़ाने में भी कोई कमी नहीं छोड़तीं ! दिनेश जी ने क्या कहना चाहा है,मैं नहीं समझ पायी ! उतनी पैनी समझ है नहीं मेरी अभी ! फिर भी पढ़ा उसके लिए धन्यवाद.
dinesh ji said that if the woman is not there then man cant produce children
he has compared woman to land
and good compostion
Rachna Ji,
I have talked about the soul of a woman if u have noticed.
Thanks for reading n explaining others point of view too ! :)
जबरदस्त ... गहरा आक्रोश लिए ... पर सोफी सदी सच रचना ...
आपको और आपके पूरे परिवार को होली की मंगल कामनाएँ ...
बड़ी तीक्ष्ण मार है शब्दों की ...
नारी के अंतर्मन को बेदर्दी से उघाडा है ...
बहुत बढ़िया !
पुरुष शरीर से या मन से होना दोनों अलग अलग बात है.शास्त्रों में पुरुष आत्मा को कहा गया है.साधारणतया जिसकी मन बुद्धि स्थिर हो उसको पुरुष कहते है.ऐसी स्थिर स्वभाव की स्त्री भी पुरुष माने जाने योग्य है.चंचल मन बुद्धि वाला पुरुष तो स्त्री माने जाने योग्य है.वैसे शरीर से पुरुष पति या केवल बच्चा पैदा करने वाला ही न होकर एक भाई,पिता ,पुत्र आदि भी होता है.पति या प्रेमी के रूप में पुरुष को शारीरिक सम्बन्ध के अतिरिक्त पत्नी/प्रेमिका के मन से मन मिलाना ही चाहिये.
नूतन परिभाषा युक्त रचना और सार्थक भाव
राकेश जी, जी हाँ बिलकुल . ये तो चित्त है जो स्त्रैण या पुरुशैन्न होता है. लेकिन अगर गौर से पढ़ा हो आपने तो ध्यान दिया होगा मैंने biologically men/women की बात की है यहाँ. और यह बयान किया है कि स्त्री मन को हलके में न लिया जाए..बल्कि उसकी गहराई तक जाया जाए .. और ये जो मैंने लिखा है, एक हज़ार स्त्रियों से पूछकर survey कर लीजिये अगर वे सहमत न हुईं तो कहियेगा ? जनाब , स्त्री की भूख पूरी मन कि है, समझ लें इस बात को. और रही बात शास्त्रों की, तो क्षमा करियेगा शास्त्रों को मैंने खारिज कर दिया था १३ वर्ष की उम्र में ! इसलिए नहीं की वे गलत लिखे गए हैं, बल्कि इसलिए कि मुझे उससे ज्यादा बेहतरीन चीज़ें मिल गयीं. मेरे लिए तो ये 'मानवता ' ही गीता , कुरान ,शास्त्र ,उपनिषद हैं .आपके भीतर बैठे परमात्मा को मेरा प्रणाम और धन्यवाद कि आपने पढ़ा . :-)
Dear Babu ,
I am highly influenced by ur writing.U have a very strong expression....!!I really appreciate.
और अपनी इस रचना में बहुत कम शब्दों में तुमने ये मन की गहराई व्यक्त की है |काबिले तारीफ है ...!!
ultimate!
kya baat kya baat.... bahaut hi behtreen baat kahi
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