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| ब्रेन्डा बेहर की द ब्रिज टु एवरीव्हेयर |
वह बिना पटरियों का पुल है, जिस पर धडधडाते हुए स्टीम इंजन वाली एक ट्रेन गुज़रती है. जलते हुए कोयले की गंध वातावरण में चिपकी रह जाती है. कुछ चिपचिपाहटें पानी की रगड़ से भी नहीं धुलतीं.
चौड़े कन्धों वाला वो लड़का अक्सर पुल पर आता है और देर तक ठहरा रहता है. चमकती हुयी उसकी आँखों में तलाश और ठहराव के भाव साथ - साथ दिखते हैं. कॉलरिज के ऐलबेट्रॉस का नाखून ताबीज़ की तरह उसके गले में हमेशा बंधा रहता है. देर तक नदी को निहारता हुआ वो ख़यालों के जंगल में कुछ तलाशता है. ऐसा लगता है जैसे उसकी उसकी आँखें नदी की देह के भीतर जल रही आत्मा की लौ खोज रही हैं. फिर पुल के ऐन बीचोबीच ठहर कर वो नदी में पत्थर फेंकने लगता है. अपने होंठ गोल करके हवा के तार पर 'बीटल्स' की धुन छेड़ते हुए वो लापरवाही से ट्रेन के पैरों के निशान पर एक नज़र डालता है और मुंह फेर लेता है. नींद की घाटियों में देर तक उसकी सीटी की आवाज़ गूंजती है. कभी- कभी वो भूखी मछलियों के लिए नदी में आटे की गोलियां डालता है और मछलियों की दुआएं जेब में डाले पैरों से पत्थर ठेलता हुआ सांझ के धुंधलके में गुम हो जाता है.
इन घाटियों में चलने वाली पछुआ हवाओं के बस्ते में बारिशें भरी हुयी हैं. जब-जब ये मतवाली हवाएं अपना बस्ता खोलती हैं, नदी का पानी पुल तक चढ़ जाता है.
इंजन का काला धुंआ ट्रेन के पीछे सड़क बनाता चलता है. बारिश में सडकें बदहाल हो जाती हैं .
मछलियाँ घर बदलने की जल्दी में है. नदी के पानी की दीवारें छोड़ कर जल्दी ही किसी मछेरे के जालीदार दीवारों वाले घर में रहने चली जाती हैं. मछलियाँ दीवारें तोडती नहीं बल्कि घर छोड़ देती हैं.
नींद में दिशाएं अपनी जगह बदलती रहती हैं. यह पता ही नहीं चल पाता कि सीटी से 'बीटल्स' की धुनें बजाने वाला लड़का किस दिशा से आता है और कहाँ गुम हो जाता है. पीछे छूट जाता है अकेला खड़ा एक पुल, जलते कोयले की गंध और पुल के ऊपर से बह रहा नदी का पानी.
मैं कोयले की गंध को खुरच-खुरच कर निकालती हूँ और उसकी सूख गयी पपड़ियों को चूम लेती हूँ. उस सूखेपन को अपनी मुट्ठी में मसलकर उसकी राख़ अपने माथे से लगाती हूँ हर दिन....
स्वप्न तुम्हारी और मेरी आँखों के बीच बना पुल हैं.









